हम सभी जानते हैं भूकंप के बारे में की पृथ्वी का अचानक हिलना भूकंप के द्वारा होता है पर, भूकंप क्या है? किसे कारण से आता है। इसका प्रभाव यानि नुकशान क्या-क्या है। भूकंप के द्वारा कितने प्रकार का तरंग निकलता है । मनुष्य के लिए भूकंप कितना खतरनाक है और इनसे कैसे बचा जा सकता है। भूकम्पीय पेटी क्षेत्र क्या है, किस स्केल पर मापा जाता है। ये सब हम इस लेख में विस्तार से पढ़ेंगे ।
भूकंप क्या है ?
पृथ्वी की ऊपरी सतह का अकस्मात ( अचानक ) काँपना भूकंप कहलाता है, जिसका कारण भूगर्भ में होने वाली उत्तल पुथल है । जिससे पृथ्वी की ऊपरी सतह रुक रुक कर सिलसिलेवार रूप में कांपती है।
भूकंप का उद्गम पृथ्वी की गहराई में स्थित किसी एक बिंदु पर (प्रायः 100 किलोमीटर से भी कम की गहराई पर) से होता है, जिसे भूकंप का उद्गम केंद्र (Focus) या भूकंप मूल कहते हैं । उद्गम केंद्र के भूगर्भ पर से ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित जिस बिंदु या पॉइंट पर कंपन सबसे पहले महसूस किया जाता है, उसे अधिकेंद्र (Epicenter) कहते हैं।
अधिकेंद्र पर कंपन सबसे ज्यादा होता है अगर पृथ्वी की इस सतह पर कोई बिल्डिंग, घर या आदमी होगा तो उस बिंदु या जगह पर भारी नुकसान या जानमाल की हानि होगी। भूकंप का परिमाप सिस्मोग्राफ यंत्र द्वारा मापी जाती है। रिएक्टर स्केल पैमाना का मान 0 से 9 तक रहता है। यह रिएक्टर स्केल धरती पर होने वाले कंपन की निरंतर माफ करता रहता है ।
रिएक्टर पैमाने पर 5 या इससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंप हल्का कम तीव्रता वाले भूकंप कहलाता है। क्योंकि इस प्रकार के भूकंप से प्रायः जान माल की कोई अधिक क्षति नहीं होती है, किंतु रिएक्टर पैमाने पर 6 या इससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंप से जानमाल की भारी क्षति होती है ।
भूकंप आने का कारण क्या है ?
वैज्ञानिकों का मानना है, कि भूकंप प्रायः टेक्टोनिक प्लेट नामक चट्टानों के आपस में टकराने के कारण आता है। इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी सतह, जिसे भूपर्पटी (Earth Crust) कहते हैं । ये 10 बड़ी विशाल चट्टानों प्लेटों और लगभग 20 छोटी-छोटी प्लेटों से मिलकर बनी है। यह चट्टानी प्लेटें एक अर्ध-द्रवित पिघलती हुई चट्टानों की परत पर तैरती है । यह प्लेट तैरने या खिसकने से आपस में टकरा जाती है जिसके फलस्वरूप पृथ्वी की सतह पर तरंग के रूप में कंपन उत्पन्न होता है । जिसे हमलोग भूकंप कहतें हैं ।
भूकंप का कारण :
- नवीन वलित पर्वत का तल
- प्लेट का विनाशकारी टक्कर ( रीड का प्रत्यास्थ प्रचलन )
- अभिसरण (आपस में टकराना → सबसे ज्यादा Danger होता है )
- अवसरण ( नॉर्मल होता है )
- मानव जनित कारण (जैसे कि Danger जगह पर बांध बना देना)
भूकंप से कौन अत्यधिक प्रभावित होता है
पृथ्वी पर भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में घनी बसी बस्तियां, एक ही जगह पर काफी अधिक संख्या में बनी कमजोर इमारतें, घनी आबादी वाले क्षेत्र, मिट्टी का ईट और घटिया किस्म की भवन-सामग्रियों का उपयोग करके परंपरागत रूप में बनाए गए इमारतें, भारी छतों और बहुत ऊंचाई वाली इमारतें जिनकी नींव (Base) कमजोर हो, भूकंप से सर्वाधिक प्रभावित होती है ।
भूकंप की खबर :
आपने हाल ही में घटी-घटना को देखा ही होगा सीरिया – तुर्की में आये भूकंप से कितनी तबाही हुई है । इस भूकंप से हजारों लोगों की जानें गई है ।
कल भूकंप से नेपाल में लगभग एक सौ से ऊपर लोगों की मौत हो चुकी है । और कई घर तबाह हो गए हैं । भारत के दिल्ली में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए ।
भूकंप का प्रभाव :
- जीवन और संपत्ति की हानि : यदि भूकंप की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 6 या अधिक हो तो उसे जान-मान की अत्यधिक हानि होती है। इससे इमारतों, सड़कों, रेल लाइनों, पुलों और बांधों आदि को भारी नुकसान पहुंचता है ।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य : चिकित्सा सेवाएं छिन्न-भिन्न हो जाती है और आस्वस्थकर परिस्थितियों के कारण महामारी फैलती हैं ।
- जलापूर्ति : बांधों, जलाशयों आदि के तटबंध के टूट जाने और जल वितरण नेटवर्क के छिन्न-भिन्न हो जाने से जलापूर्ति की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है। आग बुझाने के लिए जलापूर्ति ठप हो जाने से अग्निशमन सेवा के क्रियाकलापों पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।
- परिवहन नेटवर्क : सड़कों, रेल लाइनों, पुलों, हवाई अड्डों और सम्बंधित आधार ढाचों को क्षति पहुंचने से परिवहन संबंधित कठिनाइयों उत्पन्न होती है ।
- विद्युत और संचार : मोबाइल टावर और ट्रांसफार्मर और विद्युत लाइन छीन-भिन्न हो जाती है। जिससे विद्युत आपूर्ति और संचार सेवाओं पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।
भारत में भूकंप की आशंका वाले क्षेत्र
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भूकंप के खतरे की गंभीरता को देखते हुए भूकंप की आशंका वाले विभिन्न क्षेत्रों को नीचे एक मानचित्र में दर्शाया गया है यह नक्शा भारत सरकार की मौसम विभाग द्वारा भारत में विभिन्न वर्षो के दौरान आए लगभग 1200 भूकंप का अध्ययन करके तैयार किया गया है ।
यहाँ पर जोन 2 कम सेंसिटिव वाले क्षेत्र हैं और जोन 5 सबसे अधिक सेंसिटिव वाले क्षेत्र है। सभी रेड कलर से दिखाया गया स्थान हाई सेंसिटिव जोन है । इसमें हमारा गुजरात के कच्छ जिले आते हैं । भारत के पूर्वी राज्य भी भूकंप के क्षेत्र में आते हैं ।
भूकंप को चार जोन में बांटा गया है। भारत में सर्वाधिक भूकंप प्रभावित क्षेत्र उत्तर- पूर्वी भारत है।
भूकंप के संभावित खतरे से बचाव के उपाय
यदि हम इस बात का पूर्वानुमान लगा सके कि कोई संकट ठीक समय आएगा। तो ऐसी संकटपूर्ण स्थिति से निबटने या उसके प्रभाव को कम करने के लिए अग्रिम (पहले से) तैयारी की जा सकती है। लेकिन भूकंप की कोई भी अग्रिम चेतावनी संभव नहीं है। तथापि, किस क्षेत्र में किस वर्ष भूकंप आने की संभावना है। इस बारे में दीर्घकालिक अनुमान लगाए जा सकते हैं। लेकिन अल्पकालिक पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है, किंतु हम भूकंप से होने वाले खतरे को कम कर सकते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है ।
बचाव के उपाय :
कुशल संरचना :
- हम हस्तशिल्प और इंजीनियरों के नवीनतम ज्ञान का उपयोग करके ।
- भवन के डिजाइन (रूपांकन) और निर्माण विधि को उन्नत बना सकते हैं।
- किसी भी भवन या इमारत का निर्माण कार्य करने से पूर्व मृदा की किस्म का अच्छे से जांच होना चाहिए ।
- भवन का निर्माण मजबूत जगह पर किया जाना चाहिए। यदि इन सब नियमों का अपनाकर सुरक्षा संबंधित उपायों को भी और बढ़ा सकते हैं ।
भवन निर्माण :
- इमारत बनाने से पहले, भूकंप से बचाव के लिए सरकार द्वारा भवन निर्माण संबंधी नियम और सुरक्षा गाइडलाइन उपलब्ध कराया गया है ।
- इसके अतिरिक्त भूकंप तालिका द्वारा निर्धारित उपनियमों के अनुसार भवन आयोजन की जांच की जाती है।
- नए भवन उक्त नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्मित किए जाने चाहिए।
- मौजूदा भवनों की भूकंप के झटकों को सहन कर सकने से संबंधित आवश्यकता को ध्यान में रखकर जांच की जानी चाहिए । और भवनों को सुदृढ़ता प्रदान की जानी चाहिए ।
जन जागरूकता :
- ऐसा वस्तुकारों, भवन निर्माताओं (बिल्डरों), ठेकेदारों, डिजाइनरों, इंजीनियरों, फाइनेंसरों ( वित्त-प्रदाताओं), सरकारी तंत्र, गृह स्वामियों और राजमिस्त्रियों आदि को भावी आपदा के प्रति अति संवेदनशील बनाकर और उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करके कुछ हद तक बचाव किया जा सकता है ।
भूकंप के समय :
- भूकंप के समय यदि आप घर में हैं तो झुककर मेज या पलंग आदि के नीचे घुस जाइए। यदि बाहर खुली जगह में हो तो खुले में काफी दूर तक निकल जाइए जहां इमारत और पेड़ आदि ना हो। यदि आप वाहन (कार आदि) चला रहे हों तो वाहन को सड़क के किनारे रोकें और उससे बाहर निकलकर उसकी आड़ में झुककर बैठ जाए ऐसा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपका सिर आंख सुरक्षित रहे ।
भूकंप के बाद
कंपन रुक जाने पर : यदि आपको चोट लग गई हो तो सबसे पहले अपना इलाज कराएं। यदि आप बिल्कुल ठीक-ठाक हो तो अन्य घायलों या जरूरतमंदों की सहायता करें ।
महत्त्वपूर्ण बिंदु :-
- विज्ञान की जिस शाखा में भूकंप का अध्ययन किया जाता है, उसे सीस्मोलॉजी कहते हैं ।
- भूकंप को मापने के लिए जिस यंत्र का उपयोग किया जाता है, उसे सीस्मोग्राफ कहते हैं ।
भूकंप को किस पैमाने पर मापा जाता है ?
भूकंप को चार पैमाने पर मापा जाता है :
- फेरल
- राशि
- मरकेली ( पैमाने का मान : 1 – 12 )
- रिएक्टर स्केल ( 1- 9/10 )
आजकल भूकंप की तीव्रता को रिएक्टर स्केल द्वारा मापा जाता है ।
रिएक्टर स्केल का पैमाना रेयरेस्ट मान में 1 से 10 तक मापते हैं या दर्शाते हैं ।
भूकंप से सम्बंधित दो महत्वपूर्ण लाइन :
- ISO-Sasmal Line – (सामान तीव्रता या क्षति)
उस लाइन जो समान तीव्रता वाले क्षेत्र को मिलाता है या मिलाने वाले लाइन को Iso-Sasmal लाइन कहते हैं ।
- Homo-Sasmal Line – (समान समय)
उस लाइन को कहते हैं, जो टाइमिंग को बताता है। यानी अलग-अलग जगह पर एक समय में आया भूकंप के समय को मिलाता है । उसे होमो सेसमल लाइन कहते हैं ।
भूकंपीय तरंगे
भूकंप के द्वारा मुख्य रूप से तीन प्रकार के तरंगे उत्पन्न होती हैं।
ये तरंगे हैं : P- तरंग, S- तरंग और L- तरंग .
1. P – तरंग
- P-तरंग को प्राथमिक तरंग (Primary Wave) कहते हैं।
- इस तरंग की गति सबसे ज्यादा होती है।
- इस तरंग की आवृत्ति सबसे ज्यादा होती है और आयाम या ऊंचाई सबसे कम होती है।
- इस तरंग से क्षति सबसे कम होती है।
- पी-तरंगे ठोस द्रव एवं गैस में ट्रेवल कर सकती है।
- पी तरंगे को अनुदैर्ध्य तरंग के नाम से भी जानते हैं, इस तरंग की तरंगधैर्य यानी दूरी सबसे कम होती है ।
2. S – तरंग
- एस-तरंग को द्वितीय तरंग (Secondary Wave) कहते हैं।
- इस तरंग की गति औसत होती है।
- इस तरंग की आवृत्ति P- तरंग से ज्यादा होती है। इस तरह के आयाम या ऊंचाई P- तरंग से ज्यादा होती है।
- एस- तरंग ठोस एवं द्रव में ट्रेवल कर सकती है।
- इससे औसत क्षति होती है। इस तरंग को अनुप्रस्थ तरंग (Transverse Wave) कहते हैं। इसकी तरंगधैर्य यानी दूरी औसत होती है ।
3. L – तरंग
- एल तरंग की खोज H.D. Love ने की थी, इसलिए इसे Love Wave भी कहते हैं ।
- इस तरंग की गति सबसे कम होती है।
- एल-तरंग केवल सतह में ही ट्रेवल कर सकती है।
- L-तरंग की आयाम या ऊंचाई सबसे ज्यादा होती है, इसलिए यह अत्यधिक विनाशकारी होती है ।
- इस तरंग को अनुप्रस्थ (ट्रांसवर्स वेव) तरंग कहते हैं ।
- सबसे ज्यादा आयाम होने के कारण यह धरती पर सबसे ज्यादा तबाही मचाता है ।
भूकंप पेटी क्षेत्र
प्रशांत महासागरीय पेटी (Circum Pacific Belt) क्षेत्र : दुनिया का सबसे ज्यादा भूकंप प्रशांत महासागरीय पेटी क्षेत्र में 63 प्रतिशत आता है। यहां पर भूकंप का कारण अभिसरण के द्वारा होता है। इस कारण से इस क्षेत्र को अग्नि वलय भी कहते हैं यानी (Ring of Fire) ।
नोट : प्रश्न — प्रशांत महासागर का अग्नि वलय किस लिए प्रसिद्ध है? यह भूकंप और ज्वालामुखी दोनों के लिए प्रसिद्ध है ।
मध्य महाद्वीपीय पेटी (Mid Continental Belt) क्षेत्र : यहां पर पूरे विश्व का 21 प्रतिशत भूकंप यहां आता है। भारत भी इसी पेटी क्षेत्र में आता है, यहां भूकंप आने का कारण “अभिसरण” है। यहां अभिसरण जिस प्लेट के द्वारा होता है, उसमें अफ्रीका का प्लेट-यूरोप के प्लेट से टकराता है। जिसके कारण पठार बनना (बना) है। और इंडिया का प्लेट-युरेसाई प्लेट के द्वारा टकराने के कारण “हिमालय” का निर्माण हुआ है ।
मध्य अटलांटिक पेटी (Mid Atlantic Belt) क्षेत्र : यहां पर लगभग 16 परसेंट भूकंप आता है। यहां भूकंप आने का कारण प्लेटो का अवसरण के द्वारा होता है। जिससे ज्वालामुखी निकलता है और कटक का निर्माण करता है ।
अन्य छोटे पेटी :
यहां पर आने का कारण अभिसरण के द्वारा टक्कर होता है ।
- Fuca प्लेट → USA
- Cocos प्लेट → Mexico
- Najca प्लेट → पेरू तट के पास
ये सब तीनों प्लेटें पश्चिम में साइड से है ।
- Africa Rift → अफ्रीका के पूर्व में कारण अवसरण
- वर्मा प्लेट → अंडमान के पास
- सुंडा प्लेट → दक्षिण चीन सागर में
- फिलीपींस प्लेट → फिलीपींस में
अंटार्कटिक प्लेट :
- यहां पर एक भी भूकंप नहीं आती है। कारण यहां कोई दूसरा प्लेट नहीं है।
- जिस वजह से कोई टक्कर नहीं होता है, इस कारण से भूकंप भी नहीं आता है।
महत्त्वपूर्ण बिंदु :
- राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान आंकड़ा केंद्र नई दिल्ली में स्थित है।
- गुजरात का कच्छ प्रदेश मध्य महाद्वीपीय पेटी क्षेत्र में आता है।
- विश्व का सबसे बड़ा भूकंप पेटी क्षेत्र प्रशांत महासागरीय पेटी क्षेत्र है।
Conclusion :
हाँ, तो दोस्तों आज हमने भूकंप के बारे में विस्तार से पढ़ा, की भूकंप क्या है? इनसे कैसे सुरक्षति रहें और बचाव के उपाय क्या है। भूंकप से जुड़ी ये जानकारी हम सबके लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। यदि आप सरकारी जॉब की तैयारी कर रहे हैं तो और भी महत्त्वपूण हो जाता है आपके लिए। ये जानकारी भविष्य में हमारे काम आ सकती है। ऐसी ही अपनी ज्ञान बढ़ाते रहिये । यदि आपके मन में कोई सवाल हो, तो हमें कमेंट करके बताना नहीं भूलियेगा धन्यवाद।
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FAQs
Q1. भूकंप क्या है?
Ans- पृथ्वी का अचानक काँपना भूकंप कहलाता है।
Q2. भूकंप मापी यंत्र का क्या नाम है?
Ans- सिस्मोग्राफ
Q3. भूकंप के अध्ययन को क्या कहते हैं?
Ans- सीस्मोलॉजी
Q4. भूकंप की तीव्रता कितनी है?
Ans- 1 से 9 तक
Q5. भूकंप का मुख्य कारण है?
Ans- प्लेटों का टकराना
Q6. भूकंप की तीव्रता किससे मापी जाती है?
Ans- रिएक्टर स्केल से